ये और बात है कि मैं कुछ नहीं कहता तुमकोइस नए शौक के कुछ तो मायने होंगे।
लोग मजमून जान लेते थे कभी लिफाफे सेतुम कौन सुखनवर हो की अंजान बने रहते हो?
वह भी एक दौर था जब दिलों पर ताले कम थेअब गुजारिश है कि हवा को तो हवा रहने दो।
नशे का वक्त है शायद होश कहां अब मुमकिनयह मेरी जिद है कि पहचान बनी रहती है।
मेरी जुबान तू सच कहने में डरती क्यों हैतोहमत ए दाग से तो चांद भी न बच पाया है।