मां पार्वती को कैलाश पर बहुत दिनों बाद रंगद्वीप का कोई समाचार पत्र मिला था जिसे रुद्र अभी अभी उन्हें दे कर गए थे। प्रथम पृष्ठ पर रंगद्वीप में किसी मंदिर के उद्घाटन का जिक्र था और एक बड़ी ही मनमोहक तस्वीर भी मंदिर की छपी थी। मंदिर का जिक्र आते ही उन्हें जंबूद्वीप के काशी क्षेत्र में बने अपने आराध्य महादेव के मंदिर की याद आई जहां से वह दो वर्ष पूर्व ही होकर आईं थीं। उनकी जिज्ञासा और बढ़ गई और वह...
अपना अपना मोक्ष
प्रोफेसर शिवकुमार अपने विभाग में अपने अगले व्याख्यान की तैयारी कर रहे थे। कुछ परेशान भी लग रहे थे तभी विभागाध्यक्ष ने कक्ष में प्रवेश किया। “नमस्कार बंधु, कैसे हैं? सब कुशल तो है न? उन्होंने पूछा।न जाने कैसे उन्होंने प्रोफेसर शिवकुमार के चेहरे पर अंकित परेशानी की रेखाएं पढ़ ली थीं। “नमस्कार, सब ठीक है सर, आप कैसे हैं?” प्रोफेसर शिवकुमार ने पूछा। “मैं भी ठीक हूं, क्लास कब है?” “बस, इसके बाद।” “अरे...
पुनर्मूषको भव
महर्षि याज्ञवल्क्य के वंश में आज पहली बार एक पुत्री ने जन्म लिया था। सभी ओर प्रसन्नता थी और महर्षि याज्ञवल्क्य के प्रपौत्र अपनी पुत्री को अपनी गोद में लेकर दुलार रहे थे। उनकी पत्नी सुमेधा भी बहुत प्रसन्न थी क्योंकि महर्षि याज्ञवल्क्य के वैकुंठ जाने के बाद अब जाकर तीसरी पीढ़ी में किसी पुत्री ने जन्म लिया था। महर्षि याज्ञवल्क्य ने तो एक चुहिया को ही अपनी पुत्री बनाकर उसका विवाह किया था, आपको याद ही...
वेलकम टू पाटलिपुत्र
चलिए आज आपको कुछ पुराने दिनों से परिचित कराता हूं। पाटलिपुत्र से तो आप समझ ही गए होंगे कि मैं अपने प्रिय राज्य की बात कर रहा हूं क्योंकि यह नाम वहीं से संबंधित है, हां विरोधी पार्टी वाले कभी-कभी इसका नाम जंगलराज से जोड़ देते हैं, यह और बात है। जंगल में मंगल करना कोई हमसे सीखे, और इसके कुछ उदाहरण भी मैं आपको देता हूं। उस दिन मैं अपने गांव से बनारस जाने के लिए निकला था। गांव से थोड़ी दूर एक अन्य...
दक्खिन टोले का जिन्न
उन दिनों मैं गांव पर था। जाड़े को रात में दरवाजे पर अलाव के पास लोग बैठ जाते और बतकही चलती रहती, कभी राजनीति की, कभी बीबीसी पर चल रहे युद्ध के समाचार की, कभी गांव के छोटे मोटे झगड़ों की और कभी कुछ भूत प्रेत इत्यादि की भी। छोटी उम्र में राजनीति तो बिलकुल समझ नहीं आती थी पर राजनीतिक विषय पर जब दो लोग जोर जोर से आपस में वाकयुद्ध करने लगते तो मजा आ जाता, गर्माहट बढ़ जाती और रात का सन्नाटा कुछ कम हो...
आदर्श ग्राम बिलरिया
पी! पी! पी। पी!…पी! पी। पी!..पी। पी! सुबह के पांच बज रहे थे, अचानक तीन सीटियां एक साथ बज उठी। शोर हुआ। “पकड़ो, पकड़ो, देखो भाग जा रहा है। “अरे देखो, इधर भी है गन्ने के खेत में। एक नहीं, दो है, उधर देखो, एक उधर भागा जा रहा है।” तीनों मास्टर, मंसाराम पांडे, सहज यादव और चंदू राम सीटी बजाते हुए बोले जा रहे थे। मोबाइल से भागते हुए लोगों की फोटो लेने की कोशिश भी हो रही थी और उनके साथ आए तीनों...
पुतलियों के प्रश्न
राजा विक्रमादित्य के देहावसान के बाद सदियां बीत चुकी थीं पर भारत में उनके द्वारा स्थापित की गई राज्य व्यवस्था अभी भी वैसे ही चल रही थी । उनके सिंहासन की बत्तीस पुतलियां अभी भी सिंहासन में जड़ी हुई थीं और उनके लिए राजा की परीक्षा लेना रूटीन कार्य हो चुका था। राजा आते, जाते, फिर नए आते, सदियों से यही चल रहा था। उनके मन मस्तिष्क में धीरे धीरे एक उदासी ने घर बना लिया था। हां, नए राजा के आने के पश्चात...
वाल्टर स्मिथ का भूत
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गंगा किनारे एक गांव है रानीगंज । उस गांव के उत्तरी छोर पर एक विशाल सेमर का वृक्ष है। बड़े बूढ़े उसे भुतहा कहते थे। उसकी डालियां करीब चालीस पचास मीटर तक फैली थीं। जड़ें भी बहुत मजबूत, तने से आगे की ओर विस्तार लिए हुए। बहुत सारे पक्षी उसकी कोटरों में आश्रय लिए हुए थे। पास से ही गांव की ओर आने वाली सड़क गुजरती थी। दिन में तो मजबूरीवश राहगीर उस रास्ते आते जाते पर शाम के...
बुडुआ
‘बुडुआ’ भोजपुरी भाषा का शब्द है जो बच्चों को डराने हेतु पूर्वांचल के गांवों में खूब प्रयोग किया जाता है। यह न भूत है न प्रेत है और न जिन्न ही है। यह तालाब के पानी में रहता है और रात को राह चलते राहगीरों को तालाब में डूबा कर मार डालता है। बुडुआ के डुबाए हुए लोग बुडुआ ही बनते हैं और इस तरह उनका समूह बढ़ता रहता है क्योंकि कोई और ऑप्शन है ही नहीं। सहोदर चाचा के अनुसार इनका रंग सफेद होता...
सुप्रीम कोर्ट ऑफ देवरिया
ट्रिन,ट्रिन,ट्रिन…ट्रिन,ट्रिन,ट्रिन…ट्रिन,ट्रिन! अचानक फोन की घंटी बजी। मैं सो रहा था । घड़ी देखा तो रात के तीन बज रहे थे, मैं सोचने लगा, इस समय कौन हो सकता है? चिंता हो गई, कहीं कोई अशुभ समाचार तो नहीं, या कोई मदद के लिए बुला तो नहीं रहा? हड़बड़ा कर उठा, मोबाइल की घंटी अभी भी बज रही थी, उठाकर देखा तो डॉ भूप की कॉल थी। घबरा कर फोन उठाया, पूछा “अरे भाई क्या हुआ?” “उठिए भैया, आपको पता...