अब कहीं जड़ के सींचल जरूरी न बा
आ भोजपुरी बोलल मजबूरी न बा।
पहिन सूट बूटे में साहब निकललें
आधा उ हिंदी में उर्दू मिलवलें
अंग्रेजी के ऊपर से चिमकी लगकेवलें
आ तीनू मिला के पोजीशन बनवलें
आपन बोली बोलल केहू जानते न बा
का ह भोजपुरी केहू समझते न बा।?
लोग कहेलें चलs कुछु अच्छा सुनावs
तू जिनीगिया पे हमरे कविता बनावs
जल्दी से गावs तू ‘रिंकिया के पापा’
एकरा आगे के हमरा ना तनिको बुझाता
जवन एहमें मजा बा नाहीं कहीं अऊरी
हमरा के बस चाहेला चटनी पकौड़ी
जवन असली मिठाई केहू मांगते न बा
का ह भोजपुरी केहू समझते न बा।
केहू ना जाने कि पूर्वज का कईलें?
कवन राहि अइलें, कवन राहि गइलें?
कवन राहि लइकन के पोसलें पढ़वलें?
कवन गीत जीवन में असरा दिलवलस?
अंग्रेजन से लड़िके आजादी दिखवलस?
के भिखारी रहे, के महिंदर रहे?
के भोजपुर के लखन शाहबादी रहे?
का कईलन देवरिया के ही मोती बी ए?
के उ अंजन रहे जेकर वंदन रहे?
आपन बोली के मोल केहू बूझते न बा
का ह भोजपुरी केहू समझते न बा।
आपन भाषा के एतना बदनाम कइ दिहलें
फूहर गा गा के एतना अपमान कइ दिहलें
कबो कजरी आ सोहर सुबह सांझे रहे
गंगा मईया सी भाषा खराब कै दिहलें
संस्कृतियो गइल आ पहचनवो मिटल
अब त मीठा बोले के चलनवो हटल
अब त बतियो कहल इ जरूरी न बा
केहू फूहर बोले, आ नचनियां संग डोले
ओमें आपन बोली के मिठईये न बाs
ओमें आपन बोली के मिठईये न बाs।
अब कहीं जड़ के सींचल जरूरी न बा
आ भोजपुरी बोलल मजबूरी न बा।