कोशिशें हमारी हैं, फैसला तुम्हारा है
कुछ तो सोच कर तुमने, हमें यहां उतारा है।
जिंदगी है छोटी सी, चार दिन का डेरा है
जो भी दे दिया तुमने, कर लिया गुजारा है।
सुख औ दुख के साए में, वक्त यूं फिसलता है
मुस्कान ज्यों ही खिलती है, दर्द आ के मिलता है।
कुछ भी ना हुआ हासिल, मुझको सुख़न-साज़ी में
बस इंतजार है तेरा, इतनी ही तो बाजी है।
वह समय भी देखेंगे, जब कभी तुम आओगे
अपनी आरजूओं से हम तुमको आजमाएंगे।
हमने कैसा सोचा था, तुम न जाने क्या निकलो
लोग हमसे पूछेंगे, तुम कैसे हमसफर निकले?
मंदिरों में जा जा कर, बहुत तुमको खोजा है
इस झोपड़ी में देखूं तो, क्या तेरा बसेरा है?
बुलबुले का क्या शिकवा, खुद ही अपने मालिक से
तुम जिधर भी ले जाओ, हम तो उड़ते जायेंगे।
ओस की इन बूंदों का, जाने क्या मुकद्दर है?
घास पर चमकते ही, पानी बन फिसलतीं हैं।
डाल ही परिंदों का, बस एक आसरा ठहरा
तुमने नजर फेरी तो, हम तो उजड़ जायेंगे।
कोशिशें हमारी हैं, फैसला तुम्हारा है
कुछ तो सोच कर भगवन, हमें यहां उतारा है।