माटी के लोगवा, रहि गईलें झोपड़िये मेंसेठ साहूकार लूटि गईलें रे बिदेशिया। खेतवा में सब दिन, खटेला जे मारे मारेकेहू ओके सुधियो ना लिहलें रे बिदेशिया। सबके अटरिया बनत गईलें दसो मालागरीबन के बतिया भूलईलें रे बिदेसिया। जेठ दुपहरिया में तियना बेचत रहेबुढिया नयन भरि लोर रे बिदेसिया। छोटे छोट लईका कागजे बीनत देखलीं होकहला पर केहू ना पतियाई रे बिदेसिया। राम के देसवा में भूखल नंगा लोग अबोगांधी के सपनवां का...
भोजपुरी गीत
अमवां के बगिया से आवेले बयरिया, सबके करेले मतिभोर, हो रामा, हमके करेले मतिभोरनदिया के पनिया से उठेले लहरिया, मनवां में करत हिलोर, हो रामा, मनवां में करत हिलोर। सरसों के खेतवा में पियरी रंगाईल, महुआ चुए रे टपकोर, हो रामा, महुआ चुए रे टपकोरकौन सो देश गइलें मोरे सुगनवा, पतियो भेजे में कमजोर, हो रामा, पतियो भेजे में कमजोर। हमरे सजनवा के मति मारी गईलैं, पईसा भइल मुंहजोर, हो रामा, पईसा भइल मुंहजोरअबकी...
जहाजिन
कहियो आवs न हो..कहियो आवs न हमरो दलान चिरईकि सुनाईं हम आपन बयान चिरईबहुते उजड़ल बा मनवां के छान चिरईजबसे छूटल ऊ पुरखन के गांव सगरीहिया अइंठे हो जैसे गतान चिरईकहियो बिसरल न दिनवा पुरान चिरईकहियो आवs न हमरो दलान चिरई। कहियो आवs न हो…कहियो आवs न हमरो दलान चिरईकि सुनाईं हम आपन बयान चिरईदूर भईलें हो रिश्ता नातान सगरीहम ना जनलीं फिरंगी के चाल चिरईबहुते जालिम बा गिरमिट के जाल चिरईहमसे बिछुड़ल हो गंऊआं...