फिर खिलेंगे फूल प्रियतमफिर से होगी भोरआस की किरण जगेंगीमधुमास में चहूं ओर। रातरानी फिर करेगीनींद से मुंहजोरमोगरे पर फिर से होंगेभ्रमर, रस के चोर। सुख-दुख लिखे हैं नियति मेंज्यों दिवस में अवसानरात का होना निरंतरहै सुबह का सम्मान। सुख परखता आदमी केकर्म को, संज्ञान कोदुख परखता आत्मबल कोतेज को, अभिमान को। क्या मनुज जो रो रहा हैअल्प से ठहराव मेंक्या मनुज जो दुखी होकरडूबता अवसाद में। क्या हुआ जो आज...