कहीं सूरज दिखा दिया हमनेकहीं पर शाम कर डालीबस अपने चंद शेरों सेहर महफिल गुलाम कर डाली। हर दिन फूल खिले मिलते हैंहर एक रात रातरानी हैजब से तुम पास मेरे बैठ गएअब तो दुश्मन भी गले मिलते हैं। तेरे ही नाम जिंदगी कर लीतुम्हें ही चारागर सा मान लियाजब अंधेरों से मुलाकात हुईतुझसे ही रोशनी कर ली। प्यार का फलसफा ही ऐसा हैमेरे गीतों में आशनाई हैआधा मिसरा ही कहा है मैंनेउसके होठों पर हंसी आई है। एक दिन गिरा...
ग़ज़ल
तुम ग़ज़ल बन गई हो हमारे लिएगुनगुनाता जिसे मैं हूं हर पल प्रियेलिखता मैं जो भी तुम्हें सोचकरतुम शग़ल बन गई हो हमारे लिए। मधुप बन तलाशा करूं मैं जिसेतुम कमल बन गई हो हमारे लिएछुअन तेरी शीतल घनी छांव सीचांदनी बन गई हो हमारे लिए। तुम चमन बन गई हो हमारे लिएपुष्प कलियां जहां मुस्कुराती मिलेंकहकशां बन गई आसमां में जहांखो गए जिसमे तारे हजारों प्रिये। तुम जतन बन गई हो हमारे लिएबंध गई है प्रणय डोर तुमसे...
मिठास
वह खत जो तुमने कभी लिखे थेन जाने अब वह कहां धरे हैं?इतने बरसों के बाद हम भीन जाने किस वहमो-गुमां पड़े हैं? तुम अगरचे मिल जो जातेतो पूछते खत में क्या लिखा था?उन मौसमों के रंग क्या थेखिले थे डालों पर फूल कैसे? भुला दिया है हमने कैसेलम्हे जो इतने अजीज मुझको?सोचता हूं अब भी लौट जाऊंउस जगह जहां तुम मुझे मिले थे। जिन रास्तों पर हम चले थेउन रास्तों का क्या बना हैवह दरख़्त क्या हैं अब भी वैसेया वह सिमटकर...
गीत
कोई गीत नया, कोई राग नयागाने का जतन करते रहनासुख दुख के सारे रंगों कोजीने का जतन करते रहना कोई दर्श नया, कोई नाम नयायूं ही नहीं बनता यारोंतुम अपने अच्छे कर्मों कीपहचान सदा बनते रहना। कोई स्वप्न नया, कोई अर्श नयाकब आसानी से हासिल होता?अनजानी इन रातों मेंजगने का जतन करते रहना। उगते सूरज का नाम बड़ाबीती शामों का जिक्र नहींजो दीप तुम्हारे साथ जलेतुम याद उन्हें करते रहना। नूतन करने का द्वार सदातुम्हें...
मधुशाला
रातें कट गई गजलों में मेरीगीतों में दिवस बीत गएतेरी यादों में खो गया जबसेआज कितने बरस बीत गए। छेड़ दिया मन का तार फिरउस राग की तरन्नुम नेतेरी तलाश में फिरते हुएखुशबू के शहर रीत गए। तेरा साथ, रंगीली शामफिर लौटकर न आएगीकोशिशें लाख हों भुलाने कीदिल से अब याद कहां जाएगी? तुम मुझे सोचते होगेकिसी अनजान से शहर मेंमैं कविता में ढूंढता तुमकोतू मेरी मधु है, मधुशाला भी। जो फूलों और कलियों मेंखुशी का रंग...
सियासत
आज तेरी बातों में सियासत है बहुततभी एहसासों में बनावट है बहुत मैं तो अब भी होश मंद रहता हूंआज भी वक्त किताबों में गुजारा है बहुत। दो कदम तो चलो, हम चार कदम चल देंगेआज फिर जगने का इरादा है बहुत। चुपचाप खड़े रहने से अच्छा है मेरा मर जानावैसे भी जिंदगी में आज खतरा है बहुत। मैं तो बस ठोकर से हर दीवार गिरा डालूंआज इन दीवारों में शीशा है बहुत। जूझना होगा ही आज सोचा है बहुतअब तलक तो हमने बचाया है बहुत।...
गवारा न था
झूठ के साथ चलना गवारा न थाउसके जलसे में कोई हमारा न था। जिगर पर नए घाव फिर से हुएहमें आह भरना गवारा न था। वह कब तक चलेगा यूं ही शान सेउस महकमे से रिश्ता हमारा न था। हमने देखा बहुत झूठ की फ़र्द कोपर सबूतों का कोई सहारा न था। वह कागज की कश्ती कहां जाएगीउसने सच को कहीं भी पुकारा न था। झूठ की हरकतें बढ़ गई आजकलउसकी ज़िंदाँ में मेरा गुजारा न था। सुबह होगी मगर लोग पछता रहेझूठ को वक्त रहते सुधारा न था।...
इंतजाम
शक-ओ-शुबहा पनप रहे हो जहांवहां जाने का दिल नहीं करताहोश की मिल्कियत को अबदिल लगाने का जी नहीं करता। कोई भी बच नहीं सकताइस माहौल की मक्कारी सेजहां पर सच के दावेदारों मेंतरफदारी हद से ज्यादा है। अब चेहरे साफ नहीं दिखतेजो कभी आईने से लगते थेआज हक के तलबगारो मेंनाउम्मीदी हद से ज्यादा है। साहिबे-दरबार अब हम परकुछ मेहरबान हद से ज्यादा हैमेरा कलाम मुझसे कहता हैयहां अंधेरा हद से ज्यादा है। जो भी हो अंजाम...
फूल
खिलाओ बंजर में फूल तुम भीयह वक्त हरदम मिला नहीं है। मिलाओ खतरों से आज नजरेंयह पल भी अक्सर दिखा नहीं है। जो काम करता वह आदमी हैयह आराम का मामला नहीं है। जो पर्वतों पर बनाता राहेंआसानी से तो चढ़ा नहीं है। गहरे पानी में रत्न मिलतेऔर कोई फलसफा नहीं है। तेरा पसीना ही बनेगा मोतीवह अभी तक गुनगुना नहीं है। बढ़ाओ हाथों का जोर फिर सेअभी तुममें वह सिरफिरा नहीं है। समय कहां है कि उदास बैठोसमय तो पीछे गया...
सफर
जिंदगी के सफर में कोई रात दिनकाम करता रहा कोई सोता रहामंजिलों ने स्वयं चुन लिया रास्ताकोई पाता रहा कोई खोता रहा। सदा प्यास चलकर कुएँ तक गईसदा कोशिशें बन गई रोशनीसदा कर्म को ही मिली मंजिलेकोई जगता रहा कोई सोता रहा। जो सदा कंटको से उलझता रहावह इबारत नई एक लिखता रहासफर की थकन जिसने माना नहींवह सदा ही शिखर पर पहुंचता रहा। आशा निराशा के सोपान कितनेयूं आकर मनुज को तराशा करेंजिंदगी को निभाना बड़ी बात...