खिलाओ बंजर में फूल तुम भी
यह वक्त हरदम मिला नहीं है।
मिलाओ खतरों से आज नजरें
यह पल भी अक्सर दिखा नहीं है।
जो काम करता वह आदमी है
यह आराम का मामला नहीं है।
जो पर्वतों पर बनाता राहें
आसानी से तो चढ़ा नहीं है।
गहरे पानी में रत्न मिलते
और कोई फलसफा नहीं है।
तेरा पसीना ही बनेगा मोती
वह अभी तक गुनगुना नहीं है।
बढ़ाओ हाथों का जोर फिर से
अभी तुममें वह सिरफिरा नहीं है।
समय कहां है कि उदास बैठो
समय तो पीछे गया नहीं है।
चलो भुला दो पुरानी बातें
वह जख्म भी तो हरा नहीं है।
किसी सहारे जो चल रहे हो
यह तो कोई गुमां नहीं है।
खिलाओ बंजर में फूल तुम भी
यह वक्त हरदम मिला नहीं है।