यह बहुत है, तुम साथ हो मेरे
जीवन में मिठास छलक आई है
वरना घर में बैठकर तन्हा
हर पल का वजन गिनता।
तुम दिन के हो उजाले
रातों की महक तुम हो
होठों पर मुस्कुराहट की
बस एक वजह तुम हो।
कैसे यह समय बीता
मालूम नहीं मुझको
अभी तो हम चले थे
दो चार कदम मिलकर।
अभी तो इश्क सीखा है
मजलिस के माहिरों से
बाकी है आजमाना
कितने ही मशवरों को।
अभी तो फलसफे भी
समझ में नहीं आए
बस इतना जानता हूं
तुम हो तो जिंदगी है।
वक्त को थाम लूं बढ़कर
कितना तेज चला जाता है
डरता हूं, कहीं जल्दी से
रेत शीशे से फिसल जाए तो।
इसके पहले कि वह घड़ी आए
मैं तुझको अमर कर दूं
लिखना है शगल मेरा
हर पल को ग़ज़ल कर दूं।