मुश्किलों का दौर भी आखिर तो गुजर जाएगावक्त से भागकर कोई शख्स किधर जाएगा? धूप हो, छांव हो या तूफान सफर में आएखत्म हो जाएगा जो हालात से डर जाएगा। राह चलते हुए कदमों की थकन भूल गएजूझने से ही तो सीरत पे असर आएगा। अंधेरी रात में चरागों का असर देखो तोतमस के बढ़ते ही वो और निखर जाएगा। जगनुओं ने भी अपने नाम को जिंदा रखाबन गए रौशनी, पैग़ाम को जिंदा रखा। बहुत दिन बैठा तो लोहे की चमक जाती रहीमुश्किलें ना...
कोई गज़ल तो लिख
उन वंचितों पर भी जरा कोई गज़ल तो लिखझोपड़ी का हक जो मारे उस महल पर लिख। लबों, जुल्फों, सागरों पर शायरी आसान हैज़ुल्मतों के दौर पर भी एक बहर तो लिख। भूखे नंगे लोग किस उम्मीद से सजदा करेंअदालतें कानून हों गर बेअसर तो लिख। चांदनी पर शेर लिख जलती दुपहरी भूलतेसपने जहां पूरे न हों ऐसे बसर पर लिख। प्याला लिए साकी के साए में थिरकना चाहनाये भी भला कोई काम है अच्छा अगर तो लिख? दूसरे की आंख में आंसू का कतरा...
फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूं
फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूंडालियों पर झूल जाना चाहता हूंउम्र मेरी बस जरा सी ही सहीमैं दिलों में घर बनाना चाहता हूं। भ्रमर जैसे खोजता हूं उस मधु कोप्राप्ति जिसकी मोक्ष का पर्याय होकागज़ी इस पैरहन का क्या भरोसामैं हरेक लम्हे को जीना चाहता हूं। मधु जो अलग हो सारे मधु सेमैं होठों से लगाना चाहता हूंजो भर दे तृप्ति से मेरे हृदय कोआनंद में जीवन बिताना चाहता हूं। दृश्य हो, नृत्य भी हो, गान भी होक्षितिज...
अक्सर भूल जाता हूं
क्या खूब झगड़ा आजकल सजदाघरों का हैमैं जब भी सिर झुकाता हूं ये अंतर भूल जाता हूं। मुझे मस्जिद कलीसे भी किसी मंदिर से लगते हैंमैं उनको देखकर खुद अपना मज़हब भूल जाता हूं? है मालिक कौन दुनिया का भला मैं पूछता क्यों हूं?कि यह भी उसकी मर्जी है मैं अक्सर भूल जाता हूं। खड़ा मैं जब भी होता हूं किसी सच के शिवाले मेंलगे किस रंग के झंडे मै अक्सर भूल जाता हूं। सियासत जो भी कहती हो, हूं मैं भी आदमी आखिरहिदायत...
जब चलते चलते रात हुई
जब चलते-चलते रात हुईउन छालों से कुछ बात हुईमंजिल का कोई पता नहींफिर आंखों से बरसात हुईथक कर बैठा था मनुज मौनजुगनू बोला रोता है कौन?आंसू क्यों व्यर्थ बहाते होबाधाओं से घबराते हो? आओ मैं तेरी थकन हरूंकुछ अपने मन की बात कहूंरातों के घने अंधेरे मेंजब जलता कोई दीप नहींपदचिन्हों की हर रेख मौनकिससे पूछेगा राह कौन?जब तारों पर छाते बादलतूफान हो गया हो पागलतब भी आशाएं होती हैंकुछ परिभाषाएं होती हैं। जो...
चराग़
जब एक चराग़ बुझ गया तूफान हंस पड़ाउसने समझा अब कहीं चराग़ नहीं। जगनुओं को देकर कसम चराग़ों नेअंधेरी राह पर फिर से उजाले कर दिए। वो उजालों का निगहबान होता जाएगाजो अंधेरों में पशेमान होता जाएगा। बस एक ज़ुबान की चाहत है इन उजालों कोअंधेरे देर तक मेहमान नहीं होते हैं। थर थर कांप रही है लौ, पर जिंदा हैदेर तक वो भी अंधेरों का भरम रखती है। तुम चराग़ न सही, जुगनू ही चलो हो जानाजिसमें न तेल है, न दिया है, न...
जिंदगी
जा के फिर जिंदगी नहीं आईवो गई और फिर नहीं आई। हर शहर ढूंढ लिया हर मोड़ पे तलाशा उसकोजो खुशबू पास से गुजरी, फिर नहीं आई। उसका मधुमास सा आना मेरे पतझड़ मेंवैसी पछुए में पुरवाई, फिर नहीं आई। अब तो खुशबू के सारे शहर जैसे रीत गएमहक कुछ ऐसी करिश्माई, फिर नहीं आई। प्यास बढ़ती ही रही पर वो प्याला न मिलाप्यार में ऐसी तवानाई, फिर नहीं आई। मौसमों का भी कोई रंग न देखा ऐसावैसी सर्दी में गरमाई, फिर नहीं आई।...
घरौंदा
लोग आते रहेंगे, लोग जाते रहेंगेहम कहानी खुद अपनी बनाते रहेंगेबहारों का मौसम या पतझड़ कोईहम तुझपर दिलो-जां लुटाते रहेंगे। तुम जो चलकर थकोगे कभी राह परकांधे थपकी हम आकर लगाते रहेंगेइंद्रधनुषों में जैसे खिले सात रंगतुझको सपनों में आकर जगाते रहेंगे। हमने यहां कुछ लकीरों को खींचालकीरों से कितनों को रस्ता मिलाकभी रश्मियों से कभी जगनुओं सेहम तेरी राह रौशन बनाते रहेंगे। हमने गमों के सभी रंग देखेबहुत से...
कोहरा
मानता हूं कि अब कोहरा घना हैमगर चुप बैठने से क्या बना है? घर से निकल कुछ कर के देखोअंगीठी सेकने से क्या बना है? महज संघर्ष ही है राह वत्सलचुपचाप बैठे सोचने से क्या बना है? लड़ेंगे जूझेंगे कठिनाइयों सेसिर्फ अंगड़ाईयों से क्या बना है? जो कहते हैं कमजोर तुमकोउनके कहने भर से क्या बना है? बेमन हो के तुम कुछ भी न करनाकर्म को त्यागने से क्या बना है? अमावस भी तो अक्सर जगनुओं से हारती हैनियति से हार को...
जो न मिला सोचकर के क्या होगा?
जो न मिला सोचकर के क्या होगा?एक नए गम का सिलसिला होगा। मंजिलें और भी तो हैं मुमकिनआदमी और भी रवां होगा। फूल गर गिर गए हैं शाखों सेपुष्परज वहीं पर गिरा होगा। चमन में फ़स्ल-ए-गुल के आते हीनई कलियों का सिलसिला होगा। लकीरें खींच ले नई खुद हीलकीरें खोजने से क्या होगा? रंज का वक्त कबका बीत गयाजख्म की सोचने से क्या होगा? अंधेरे जगनुओं से हार गएरौशनी खोजने से क्या होगा? राह पर आगे को कदम तो बढ़ासिर्फ बस...