झूठ के साथ चलना गवारा न था
उसके जलसे में कोई हमारा न था।
जिगर पर नए घाव फिर से हुए
हमें आह भरना गवारा न था।
वह कब तक चलेगा यूं ही शान से
उस महकमे से रिश्ता हमारा न था।
हमने देखा बहुत झूठ की फ़र्द को
पर सबूतों का कोई सहारा न था।
वह कागज की कश्ती कहां जाएगी
उसने सच को कहीं भी पुकारा न था।
झूठ की हरकतें बढ़ गई आजकल
उसकी ज़िंदाँ में मेरा गुजारा न था।
सुबह होगी मगर लोग पछता रहे
झूठ को वक्त रहते सुधारा न था।
मानता हूं कि बैठा है बख्तर पहन
आजमाने में कोई खसारा न था।