ओस की एक बूंद
गिरी घास पर
कोने पर अटकी
थोड़ी सी ठिठकी।
फिर बोली मुझसे
तू क्या देखे मोय
पल ही जीवन मेरा
साथ न आया कोय।
फिर भी मैं हंसती हूं
हीरे सी चमकती हूं
सतरंगी रंग लिए
किरणों का संग लिए।
एक ठंडा शीतल सा
कोमल एहसास मेरा
जैसे कोई सपना हो
पल भर इतिहास मेरा।
यह दूब हरित चादर
छोटा आकाश मेरा
सूरज के चमकते ही
पानी बन जाऊंगी।
तुम आए धरती पर
एक लंबी उम्र लिए
फिर भी हो संशय में
है क्या प्रारब्ध तेरा?
जीवन तेरा सुंदर
सतकर्मों का अवसर
बन कर्मरती मन से
तुम बढ़े चलो अविरल।
एक दिन मोक्ष तुझे
आ खुद ही ढूंढेगा
किरणों सा परिचय
एक दिन हासिल होगा।
एक क्षणिक अवसर
काफी है चमकने को
बूंदे ज्यों स्वाति में
मोती बन जाती हैं।
फिर तुम फूलों जैसे
खुशबू में फना होना
नाम अमर लेकर
धरती से विदा होना।
लिखेंगी सदियां
तेरी अमिट कहानी को
और पूजेंगे परिजन
तेरे कदमों की निशानी को।