लाखों सपने ढेरों गम
खुशियों के पल बहुत ही कम
आस टूटती हो राहों पर
फिर भी न करना आँखें नम।
लाखों सपने ढेरों गम…
कभी न करना आँखें नम।
तूफानों का शोर बोलता
हम देखेंगे किसमें है दम?
कौन चढ़ेगा शौर्य शिखर पर
कौन गिरेगा हो बेदम?
लाखों सपने ढेरों गम…
कभी न करना आँखें नम।
छाए हों बादल, रात अंधेरी
पांव में छाले, टूटता दम
मांग न लेना कोई सहारा
जिससे होगी कीमत कम।
लाखों सपने ढेरों गम…
कभी न करना आँखें नम।
जीवन की इस कर्मभूमि पर
हर पल नूतन हर पल भिन्न
आते कल को किसने देखा
करते जाओ श्रम अनगिन।
लाखों सपने ढेरों गम…
कभी न करना आँखें नम।
मन संशय में अक्सर होगा
थकन हो गई, बोझिल मन
हर राही की यही परीक्षा
गति बढ़ती या जाती थम?
लाखों सपने ढेरों गम…
कभी न करना आँखें नम।
सुबह तो होगी, धुंध छंटेगी
गीतों की सरगम गूंजेगी
बगिया में फिर फूल खिलेंगे
दिवस उजालों का मौसम।
लाखों सपने ढेरों गम…
कभी न करना आँखें नम।
फ़स्ल-ए-गुल आयेगी फिर से
सावन के झूले भी होंगे
चांदनी फिर बाहों में लेगी
रातें महकेंगी गम-गम।
लाखों सपने ढेरों गम…
कभी न करना आँखें नम।