कहीं सूरज दिखा दिया हमने
कहीं पर शाम कर डाली
बस अपने चंद शेरों से
हर महफिल गुलाम कर डाली।
हर दिन फूल खिले मिलते हैं
हर एक रात रातरानी है
जब से तुम पास मेरे बैठ गए
अब तो दुश्मन भी गले मिलते हैं।
तेरे ही नाम जिंदगी कर ली
तुम्हें ही चारागर सा मान लिया
जब अंधेरों से मुलाकात हुई
तुझसे ही रोशनी कर ली।
प्यार का फलसफा ही ऐसा है
मेरे गीतों में आशनाई है
आधा मिसरा ही कहा है मैंने
उसके होठों पर हंसी आई है।
एक दिन गिरा कर रख दूंगा
हर दीवार रश्को-रंजिश की
अभी जो और सिम्त बैठे हैं
हो गई उनको मेरी आदत भी।
तुझको देखा तो खुशी कह डाली
न देखा तो शाम कर डाली
जब से आया हूं बज़्मे-उल्फत में
हर गजल तेरे नाम कर डाली।
कहीं सूरज दिखा दिया हमने
कहीं पर शाम कर डाली
बस अपने चंद शेरों से
हर महफिल गुलाम कर डाली।