अभी भी समय है सुधर जाइए
बहुत लंबा सफर है सुधर जाइए।
देख लो लालिमा पूर्व में दिख रही
जल्द होता सहर है सुधर जाइए।
आंधियां कब रही किसी कैद में
रात अंतिम पहर है सुधर जाइए।
नफरत की खेती बुरी चीज है
बीत जाए न खुद पर सुधर जाइए।
यह माना नशे में है ताकत बहुत
पर जल्दी उतरता सुधर जाइए।
जाने कितने घरौंदे यूं ही टूटते
दर्द देता कहर है सुधर जाइए।
तल्ख़ियां कब तलक गूंजती रह गई
उसकी सब पर नजर है सुधर जाइए।