पढ़ लिख के सुगना पिंजड़वा के तोड़ दजवने बा अन्हार के बंधन सगरो उजाड़ द। बाप के जिनगिया बीतल रोटी के जोगाड़ मेंबहुत रात माई सुतली मन के उजाड़ मेंसगरो आपन सुख भूललें फीस के जुटान मेंकईसे तू भुला गईल ई शहर के बाजार में? पढ़ लिख के सुगना पिंजड़वा के तोड़ दजवने बा अन्हार के बंधन सगरो उजाड़ द। जवन बा हथेली पे लिखल ऊहो बदल जालाकरम से त बंजर में भी अंकुर हो जालाहार माने ऊहो कवनो अदमी कहाला?उठs उठs मरम...
ये उलझनों के साए
ये उलझनों के साए जब भी हैं मन पे छाएहैं मुश्किलें सिखातीं कि कैसे कदम बढ़ाएं? अंधेरी सी उस डगर पर हो कोई न साथ तेरेफिर भी है राह मुमकिन जगनुओं ने सिखाए। डरना नहीं कभी तुम अनजाने रास्तों परबस हिम्मतों ने कितने सफर खुशनुमा बनाए। चलना तो होगा सबको हो वसंत या मरू होपर जीतता वही है जो आगे को बढ़ता जाय। बंजर सी रेत पर मैं ये गज़ल लिख रहा हूंहंसकर जो मुझसे कहती आ तुझको आजमाएं? एक शेर मेरा रख लो इस राह...
गांव बचा कर रखना
शहर में तो आ गए होपर गांव बचा कर रखनागर्मी यहां बहुत हैतुम छांव बचा कर रखना। वहां लगते थे कभी मेलेयहां रोज ही है मेलातुम इनमें खो न जाओये भाव बचा कर रखना। छलिया हैं सब यहां परये चकाचौंध रोशनी भीउजालों के पीछे छुपकरहै अंधेरों ने रहजनी की। चलना यहां संभलकरलुटते हैं रोज कितनेखाकर हजार धोखे भीस्वभाव बचा कर रखना। माटी ही आदमी हैसोंधी है जिसकी खुशबूयह शहर है बनावटआधार बचा कर रखना। झोली भले रहे...
जो नहीं खिले थे गुल कभी
जो नहीं खिले थे गुल कभीवो भी इस बहार में खिल गएजब तुम हो मुझको आ मिलेमेरे अंदाज ही हैं बदल गए। जो उजाले मेरी राह परकभी भूल कर भी गए नहींवो हैं खुद ही आकर पूछतेकि हम किधर को निकल गए? जो पहले थी आवारगीवो है ताजगी में बदल गईजो भी जिंदगी से मलाल थेवो रफ्ता रफ्ता संवर गए। जो थे सहमे सहमे थके थकेउन हौसलों में उड़ान हैजो भी गमों के दयार थेवो गज़ल बन के निखर गए। अब दश्त क्या, खिजां है क्या?मुझे कोई भी...
आदत
कविता जा रही हैपुस्तकें भी जा रही हैंतुमको हो गई आदतअब मसाले की। संस्कृति भी जा रही हैधर्म भी जा रहे हैंफिक्र किसको हैअब रीति-रिवाजों की? गीत की सांस टूटीकथाकारी तिरस्कृत हैतुमको हो गई है आजचिंता बस निवाले की। लोक भाषाएं हमारीगुड़ की चाशनी सीतुमको हो गई आदतअलग सा गुनगुनाने की। रचना सिमटकर पुस्तकों मेंचंद सांसे गिन रही हैतुमको हो गई आदतनजरें चुराने की। सभ्यताएं मिट गई कितनीइसी तरह, धीरे धीरेतुमको...
ये बहुत बड़ी बात है
जहां बगीचे थे, वहां रेगिस्तान हो गएघरों के आसपास कूड़ेदान हो गएतलो-तालाब सूखकर अनजान हो गएखेत खलिहान अब दुकान हो गए। घर घर न रहे, ऊंचे मचान हो गएलिहाज और शर्म बदनाम हो गएमंदिर, जो कभी थोड़ा सुकून देते थेसिमटकर अब गुमनाम हो गए। कोई रहे कहां और जाए कहां आजदरो दीवार सारे इश्तिहार हो गएदुनिया इतनी बदली कब, पता नहीं मुझेदिल के शीशे टूट कर गाहे गराज हो गए। खुली हवा का एक झोंका दूभर हुआ जहांअब कैमरे हैं...
रौशनी
जहां तक रौशनी नहीं जातीवहां भी मेरी गजल जाएहौसले मेरे कम नहीं होगेभले ताउम्र यह सफर जाए। रोज ही एक नए फसाने काअजीब शौक है तुझकोलिख दूं मैं तुझ पर शेर कोईतेरा नकाब ही उतर जाए। चलो कुछ आग छुपी रहने दूंइश्क भी, रंज भी अपनाकुछ दिनों बाद देखेंगेकहां क्या-क्या लिखा जाए? मैं बहुत दूर निकल आयाजैसा उसने मुझसे चाहा थाअब तो पिछला मरहला मुझकोज़रा ज़रा सा ही बसर आए। अब कलम है, चंद गजलें हैंमैं ही उस्ताद हूं...
संसार
यह प्यारा मधुमय सा संसारप्रात खोले है मन का द्वारदिवस भर खुशियों का अंबाररात को तारों में घर बार। क्षितिज जब उगता है सोनानींद छोड़े हैं हर कोनाकूकते कलरव करते खगकिरण से जगमग होता जग। फूल खिल उठते हैं सारेअंगड़ाई लेती हैं कलियांखुशबू फैल रही हर ओरजहां मदमस्त हो गए मोर। सुबह की भीगी यह खुशबूबुलाती मुझको अपने पासपुष्प पर भ्रमरो की अनुगूंजलगता है आया ज्यों मधुमास। फैलती महुए की चादरटपा टप पेड़ों के...
मुकाम
बहता रहा सदा ही नदी की धार में जैसेकुछ हाथ में था ही नहीं पतवार के जैसे। करता रहा सफर एक अनजानी डगर परजिस राह पर कोई न निकला था बसर पर। तिनका हूं मेरे हाथ में कुछ भी तो नहीं हैनजरों में दूर दूर तक कोई भी नही है। बस मान लिया मैने कि तू साथ खड़ा हैतबसे मेरा अंदाजे-बयां सबसे जुदा है। मालूम नहीं पंक्तियां ये कौन लिख रहाचुपचाप खड़ा देखता कागज़ सिमट रहा। कोई गज़ल भी मुझमें है सोचा ही नहीं थाएक गीत कभी...
कोशिशें हमारी हैं
कोशिशें हमारी हैं, फैसला तुम्हारा हैकुछ तो सोच कर तुमने, हमें यहां उतारा है। जिंदगी है छोटी सी, चार दिन का डेरा हैजो भी दे दिया तुमने, कर लिया गुजारा है। सुख औ दुख के साए में, वक्त यूं फिसलता हैमुस्कान ज्यों ही खिलती है, दर्द आ के मिलता है। कुछ भी ना हुआ हासिल, मुझको सुख़न-साज़ी मेंबस इंतजार है तेरा, इतनी ही तो बाजी है। वह समय भी देखेंगे, जब कभी तुम आओगेअपनी आरजूओं से हम तुमको आजमाएंगे। हमने कैसा...