कितने चले गए, कितने बिछड़ गए
यह मलाल रह गया, कि गले न लग सके
इस राह चलते चलते, कई हमसफर मिले
यह मलाल रह गया, कि अपने न बन सके।
कितनों के साथ अपनी कुछ रंजिशें रहीं
यह मलाल रह गया, न मसले सुलझ सके
फिर से अगर जुड़े भी बरसों से टूटे रिश्ते
यह मलाल रह गया, कि वैसे न रह सके।
कितने हसीन पल भी आ कर निकल गए
यह मलाल रह गया, क्यों ना संजो सके?
वह पल कभी न लौटा, जो आकर गुजर गया
यह मलाल रह गया, कि हम देखते रहे।
अपनी खरी थी बात, यही बस भरम रहा
यह मलाल रह गया, उसकी न सुन सके
दोस्त हमने छोड़े, जरा सी ही थी अदावत
यह मलाल रह गया, फिर से न मिल सके।
कितने चले गए, कितने बिछड़ गए
यह मलाल रह गया, कि गले न लग सके!