आओ मेरे पास आओ प्रियतमा
अपनी खुशबू से मिलाओ प्रियतमा
जानता मनुज मैं बेकार सा मैं हूं
तुम मुझे चंदन बनाओ प्रियतमा।
यूं तो फूलों पर बहुत से रंग आए
भ्रमर के गीत भी कलियों को भाए
जो फागुन के रंगो में होता सम्मिश्रण
तुम वही मुझको लगाओ प्रियतमा।
मैं वक्त को गजलें सुनाता रह गया
तेरे रूप को भी ठीक से देखा नहीं
आज जागी मेरे मन की हररितिमा
तुम जिंदगी मेरी सजाओ प्रियतमा।
संसार में मुझसा अनूठा कौन है
तुम जो पारस से मेरे सहचर बने हो
सैकड़ों तमगे भी लेकर क्या करूंगा
तुम नाम से मुझको बुलाओ प्रियतमा।
समय का पहिया तो चलता रह गया
मैंने कितनी बार बोला धीमे चल तू
राह पर मेरी जो कुछ नाकामियां है
आज उन सबको भुलाओ प्रियतमा।
जो मिला है वह बहुत काफी मिला है
पर जाने मेरी प्यास कैसे रह गई?
आज फिर गजरे सजाओ प्रियतमा
अंक से मुझको लगाओ प्रियतमा।
यूं तो कहने को बहुत है पास मेरे
पर समय से अनुबंध कितना कौन जाने?
खुद को जब तुझे ही जब सौंप डाला
तुम प्रेम की मुझको सजा दो प्रियतमा।