राह पर प्रस्थान फिर फिर
मार्ग का अनुमान फिर फिर
धूप हो या छांव फिर फिर
गेह का निर्माण फिर फिर।
कर नमन इन बाजुओं का
स्वेद का कर दान फिर फिर
कर्म पथ पर फिर भरोसा
प्रारंभ हो श्रमदान फिर फिर।
बस यही तो जिंदगी है
प्राप्ति का अरमान फिर फिर
लक्ष्य पर संधान फिर फिर
प्रेम का सम्मान फिर फिर।
गर्दिशों की शाम जो हो
सुन ग़ज़ल की तान फिर फिर
मरू हो या गुलशन कोई हो
नीड़ का निर्माण फिर फिर।
ले मधु का जाम फिर फिर
कर खुशी का गान फिर फिर
जो मिला काफी मिला है
स्वयं पर अभिमान फिर फिर।
चलते ही जाना जिंदगी है
बांध ले सामान फिर फिर
अगली सुबह हम फिर मिलेंगे
अधर पर मुस्कान फिर फिर।