अब कोई मेहमान रुक नहीं पाता
झट से आता है चला जाता है।
अभी तो पुरसाहाल भी न पूछा मैंने
फिर आऊंगा, नहीं है वक्त सुना जाता है।
समय की भेंट चढ़े सब रिश्ते मेरे
जिंदगी रेत के मानिंद फिसल जाती है।
दिल हो गए अब दूर कि तलबगारी में
उनका आना भी एक जख्म लगा जाता है।
मैं भी हूं, वे भी है, सब कुछ तो है दुनिया में
मेरा घर खाली है, खाली ही रह जाता है।