रातें कट गई गजलों में मेरी
गीतों में दिवस बीत गए
तेरी यादों में खो गया जबसे
आज कितने बरस बीत गए।
छेड़ दिया मन का तार फिर
उस राग की तरन्नुम ने
तेरी तलाश में फिरते हुए
खुशबू के शहर रीत गए।
तेरा साथ, रंगीली शाम
फिर लौटकर न आएगी
कोशिशें लाख हों भुलाने की
दिल से अब याद कहां जाएगी?
तुम मुझे सोचते होगे
किसी अनजान से शहर में
मैं कविता में ढूंढता तुमको
तू मेरी मधु है, मधुशाला भी।
जो फूलों और कलियों में
खुशी का रंग छाया है
वही तो आज भी मेरा
हर राह पर हमसाया है।
कहीं से तुमने अधरों पर
कोई गीत गुनगुनाया है
गुलमोहर लाल हुआ
मधुमास फिर से आया है।
मैं जो लिखता हूं कुछ भी
दिल की कलम तुम हो
हर समय साथ होने का
खूबसूरत सा वहम तुम हो।
तुमने शायर बना दिया मुझको
मैं तो शौक-ए-ग़ाफ़िल था
प्रेम का ही कमाल यह है
और में कहां किसी काबिल था?