आज तेरी बातों में सियासत है बहुत
तभी एहसासों में बनावट है बहुत
मैं तो अब भी होश मंद रहता हूं
आज भी वक्त किताबों में गुजारा है बहुत।
दो कदम तो चलो, हम चार कदम चल देंगे
आज फिर जगने का इरादा है बहुत।
चुपचाप खड़े रहने से अच्छा है मेरा मर जाना
वैसे भी जिंदगी में आज खतरा है बहुत।
मैं तो बस ठोकर से हर दीवार गिरा डालूं
आज इन दीवारों में शीशा है बहुत।
जूझना होगा ही आज सोचा है बहुत
अब तलक तो हमने बचाया है बहुत।
कुसूर मेरा था सब को जगा कर देख लिया
अपने अहबाबों को पुकारा है बहुत।
गिनाए फायदे तुमने बहुत से जुबां-फरोशी के
उसने ईमान वालों को सताया है बहुत।
आज मालूम हुआ दूसरी सिम्त क्या होती
अपने करीब वालों को बुलाया है बहुत।
क्या होता जो हम भी मौसम के हिसाब से चलते
अब सियासत में सिर्फ एक रंग छाया है बहुत।
हमने कोई भी गुलशन एक रंग नहीं देखा
क्या तुमने देखा है जिसका चर्चा है बहुत?