मानता हूं कि अब कोहरा घना है
मगर चुप बैठने से क्या बना है?
घर से निकल कुछ कर के देखो
अंगीठी सेकने से क्या बना है?
महज संघर्ष ही है राह वत्सल
चुपचाप बैठे सोचने से क्या बना है?
लड़ेंगे जूझेंगे कठिनाइयों से
सिर्फ अंगड़ाईयों से क्या बना है?
जो कहते हैं कमजोर तुमको
उनके कहने भर से क्या बना है?
बेमन हो के तुम कुछ भी न करना
कर्म को त्यागने से क्या बना है?
अमावस भी तो अक्सर जगनुओं से हारती है
नियति से हार को स्वीकारने से क्या बना है?