लोग आते रहेंगे, लोग जाते रहेंगे
हम कहानी खुद अपनी बनाते रहेंगे
बहारों का मौसम या पतझड़ कोई
हम तुझपर दिलो-जां लुटाते रहेंगे।
तुम जो चलकर थकोगे कभी राह पर
कांधे थपकी हम आकर लगाते रहेंगे
इंद्रधनुषों में जैसे खिले सात रंग
तुझको सपनों में आकर जगाते रहेंगे।
हमने यहां कुछ लकीरों को खींचा
लकीरों से कितनों को रस्ता मिला
कभी रश्मियों से कभी जगनुओं से
हम तेरी राह रौशन बनाते रहेंगे।
हमने गमों के सभी रंग देखे
बहुत से बहारों के मौसम भी देखे
पर अपना भरोसा न टूटा कभी
हम फिर से घरौंदा बनाते रहेंगे।
कहां आदमी को सभी कुछ मिला?
चाहों का आखिर थमा सिलसिला
लोग टुकड़ों में जीवन बिताते रहेंगे
लोग आते रहेंगे, लोग जाते रहेंगे।
हम तुझे देख कर सब भुलाते रहेंगे
हम कहानी खुद अपनी बनाते रहेंगे!