फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूं
डालियों पर झूल जाना चाहता हूं
उम्र मेरी बस जरा सी ही सही
मैं दिलों में घर बनाना चाहता हूं।
भ्रमर जैसे खोजता हूं उस मधु को
प्राप्ति जिसकी मोक्ष का पर्याय हो
कागज़ी इस पैरहन का क्या भरोसा
मैं हरेक लम्हे को जीना चाहता हूं।
मधु जो अलग हो सारे मधु से
मैं होठों से लगाना चाहता हूं
जो भर दे तृप्ति से मेरे हृदय को
आनंद में जीवन बिताना चाहता हूं।
दृश्य हो, नृत्य भी हो, गान भी हो
क्षितिज की लालिमा का भान भी हो
सहज स्वीकार्यता हो मृत्यु की भी
मैं स्वर्ग को ठोकर लगाना चाहता हूं।
घूंट भर पी लिया है जिसने उसको
मुक्त है बंधनों जीवन मरण से
हे साकी, दे ही दे तू आज अमृत
मैं समय के पार जाना चाहता हूं।
हाथ पैमाना मेरे हो एक गुलाबी
झांकते हों बुलबुले ज्यों बोलते से
जिसे पी कर तृप्त हो ले प्यास मेरी
रह न जाए मेरे मन में चाह कोई।
तब होंठ की लाली बताए मैने पी है
कोई भला तब क्यों छुपाए मैने पी है?
क्षणिक ही आनंद भारी मेरे होने पर
मैं मृत्यु से नजरें मिलाना चाहता हूं।
फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूं
डालियों पर झूल जाना चाहता हूं
उम्र मेरी बस जरा सी ही सही
मैं दिलों में घर बनाना चाहता हूं।