पिछला मौसम बीत गया
था वह कितना अपना सा
बस कुछ डालों पर फूल न थे
पर था वह कितना सपना सा।
पिछले मौसम में हमने कितने
कलियों पर अपना दिल हारा
पिछला मौसम ही मौसम था
भंवरे रस पीकर मदमस्त हुए।
पिछले मौसम में हमने तेरे
बालों को बदली मान लिया
पिछला मौसम में ही तुमने
कजरारे अपने नैन किए।
पिछले मौसम में कोयल ने
अपने मन की बात कही
मधु के गुच्छे डालो पर लटके
अमिया से अनुबंध हुए।
पिछले मौसम में हमने
गीतों में सब कुछ लिख डाला
पिछले मौसम में गुलशन ने
कैसे अद्भुत श्रृंगार किए।
पिछले मौसम में हमने
तेरी आंखों में सागर देखा
पिछले मौसम में ही तो हमने
मधुरस की गागर देखा।
बेला से महका मेरा आंगन
चंदा का वह आलिंगन
मौसम के अनुपम उद्दीपन
छंदों का दीवानापन।
तुम फिर आना मकरंद लिए
फूलों की सौगंध लिए
हम तुम आ मिल बैठेंगे
मन से मन के अनुबंध लिए।
पिछला मौसम बीत गया
था वह कितना अपना सा
बस कुछ डालों पर फूल न थे
पर था वह कितना सपना सा।