तुमसे मिलने की उम्मीद करता रहूं
साथ चलने की उम्मीद करता रहूं
लोग कहते हैं तुम अब समझने लगे
मन के मिलने की उम्मीद करता रहूं।
अब तलक तो रही दूरियां दरमियां
शायद मुझसे बड़ी हैं वे मजबूरियां
तुम बंधन कभी भी छुड़ा ना सके
तुम दिलासे भी मुझको दिलाना सके
यूं तो आए कई पल मुलाकात के
बंद खुल ना सके अपने जज्बात के
है किया फैसला की कह देंगे हम
मन में जो भी छुपे हैं कमल भाव के।
तुम जो चाहो तो कुछ मशवरे तुमको दूं
रोज फुरसत में आकर मैं तुमसे मिलूं
शायद मिलने से दोनों की किस्मत खुले
यह जो मंजर उदासी का शायद धुले।
हम मिलेंगे तो फिर बात बन जाएगी
तुम सहज ही मेरी मीत बन जाओगी
जो वियोगी है प्रेमी उस इतिहास में
मुझको लगता कहानी बदल जाएगी।
तुम आओ जीवन में वसंत सा लगे
मिलाओ कदम तो यह मौसम खिले
तेरे संग चलने में जो मजा आएगा
उसे कविवर कहां कोई लिख पाएगा?
नई एक कहानी हम मिलकर लिखें
प्रेम का है शगुन आ गले हम मिले
लो पवन में उमंगों की है रागिनी
फैली जीवन के पथ पर सदा चांदनी।
देखो खुशबू हवा में पिघलने लगी
वह कली झूम कर मुझसे कहने लगी
प्रेम के सिलसिले की तुम शुरुआत हो
तुम मेरी जिंदगी में एक सौगात हो।
है बहारों का मौसम खिला हर चमन
नीले से पर्वतों पर हैं बादल सघन
यूं लगता है बरसात हो जाएगी
मेरी तुमसे मुलाकात हो जाएगी।
सात जन्मों की बातें मैं करता नहीं
प्रेम तुमसे निभाना है मुझको यहीं
किसने देखा है मरने पर क्या होता है
जो जीवन सजाना सजा लूं यहीं।
मिलकर हम एक जान बन जाएंगे
यह सफर उत्सवो में गुजर जाएगा
तुम चंदन मेरे तुम्ही सागर भी हो
प्यास मिटने की उम्मीद करता रहूं।
तुमसे मिलने की उम्मीद करता रहूं
साथ चलने की उम्मीद करता रहूं ।