तुम ग़ज़ल बन गई हो हमारे लिए
गुनगुनाता जिसे मैं हूं हर पल प्रिये
लिखता मैं जो भी तुम्हें सोचकर
तुम शग़ल बन गई हो हमारे लिए।
मधुप बन तलाशा करूं मैं जिसे
तुम कमल बन गई हो हमारे लिए
छुअन तेरी शीतल घनी छांव सी
चांदनी बन गई हो हमारे लिए।
तुम चमन बन गई हो हमारे लिए
पुष्प कलियां जहां मुस्कुराती मिलें
कहकशां बन गई आसमां में जहां
खो गए जिसमे तारे हजारों प्रिये।
तुम जतन बन गई हो हमारे लिए
बंध गई है प्रणय डोर तुमसे मेरी
मैने पाया तुम्हें है बड़े यत्न से
तुम सुखन बन गई हो हमारे लिए।
बहुत उम्र गुजरी खिजां में यूं ही
तुम बशर बन गई हो हमारे लिए
गर्दिशें मुझसे यूं दूर भागा करें
ज़िंदगी बन गई हो हमारे लिए।
तुम अमन बन गई हो हमारे लिए
तुमसे मिलकर मेरी प्यास ही मिट गई
तुम ग़ज़ल बन गई हो हमारे लिए
गुनगुनाता हूं जिसको मैं हर पल प्रिये।