कहियो आवs न हो..
कहियो आवs न हमरो दलान चिरई
कि सुनाईं हम आपन बयान चिरई
बहुते उजड़ल बा मनवां के छान चिरई
जबसे छूटल ऊ पुरखन के गांव सगरी
हिया अइंठे हो जैसे गतान चिरई
कहियो बिसरल न दिनवा पुरान चिरई
कहियो आवs न हमरो दलान चिरई।
कहियो आवs न हो…
कहियो आवs न हमरो दलान चिरई
कि सुनाईं हम आपन बयान चिरई
दूर भईलें हो रिश्ता नातान सगरी
हम ना जनलीं फिरंगी के चाल चिरई
बहुते जालिम बा गिरमिट के जाल चिरई
हमसे बिछुड़ल हो गंऊआं जवार सगरी
कबो आइल ना केहू सवांग चिरई
कहियो आवs बिलाईल के गांव चिरई।
कहियो आवs न हो…
कहियो आवs न हमरो दलान चिरई
कि सुनाईं हम आपन बयान चिरई
काहे चढ़नी ऊ राकस नियर नाव पर?
रोज मरिचा के जइसन लगे घाव पर
हम समुंदर में घिर गईनी सीता नियर
रोज खोजीला आपन हनुमान चिरई
बहुते उजड़ल बा मनवां के छान चिरई
कैसे फंस गईंनी होला मलाल चिरई
कहियो आवs भुलाईल के गांव चिरई।
कहियो आवs न हो…
कहियो आवs न हमरो दलान चिरई
कि सुनाईं हम आपन बयान चिरई
साथ अपने ले अईनी रामायण ईहां
ऊ बनल सबके जियले अधार चिरई
साथ गीता ले अईनी हम आपन धरम
ऊ भुला देलस दुखवा से बोझिल नयन
तुलसी मानस बनल सगरो धाम चिरई
तबे बाचल पुरबिया पहिचान चिरई
कहियो आवs हेराईल के गांव चिरई।
कहियो आवs न हो…
कहियो आवs न हमरो दलान चिरई
कि सुनाईं हम आपन बयान चिरई
कबो आईब हम चढ़ि के विमान चिरई
सगरो घूमब तीरथ अउर धाम चिरई
पूरा होई पुरख के मनान चिरई
जेकर छूटल इंहां पर परान चिरई
गंगा मैया में करिके नहान चिरई
हमहुं जाईब अयोध्या के धाम चिरई
कहियो आवs भुलाईल के गांव चिरई।
कहियो आवs न हो…
कहियो आवs न हमरो दलान चिरई
कि सुनाईं हम आपन बयान चिरई
का जहाजिन के केहू कहानी लिखी?
नाहीं पीड़ा के अईसन बयानी दूसर
आज भींजल नयन के कमान चिरई
बाति कहले में रूंध जाता बान चिरई
जाके कहिहs तू ‘वत्सल’ से हाल चिरई
कबो आइल ना केहू सवांग चिरई
कहियो आवs भुलाईल के गांव चिरई
कहियो आवs बिलाईल के गांव चिरई।